*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
*अधुना कुसुमाकरः ऋतुः प्रचलति ।*
= अभी वसंत ऋतु चल रही है ।
*अस्मिन् ऋतौ प्रकृतिः नूतना भवति ।*
= इस ऋतु में प्रकृति नई हो जाती है ।
*वृक्षेषु कोपलपत्राणि विकसन्ति ।*
= पेड़ों पर कोपल पत्तियाँ विकसित होती हैं ।
*एवं पत्रेषु विशेषः औषधीयगुणः वर्तते ।*
= इस प्रकार की पत्तियों में विशेष औषध के गुण होते हैं ।
*चैत्रमासे निम्बपत्राणि खादितव्यानि ।*
= चैत्र माह में नीम की पत्तियां खानी चाहिए ।
*कथ्यते नवरात्रे तु अवश्यमेव खादितव्यानि ।*
= कहा जाता है नवरात्रि में जरूर खाना चाहिए ।
*पत्रैः सह मरीचिका अपि मेलनीया ।*
= पत्तियों के साथ मरिच भी मिलानी चाहिए ।
*सप्त निम्बपत्राणि पञ्चगुलिकाः च मरीचिकायाः ।*
= सात नीम की पत्तियां और पांच गोलियां मरिच की ।
*एतेषां चर्वणं अथवा पेषणं कृत्वा गुलिकारूपेण सेवनं कर्तव्यम् ।*
= इनको चबाकर या पीसकर गोलीरूप में सेवन करना चाहिये ।
*एतेन ज्वरादयः ग्रीष्मरोगाः न उद्भवन्ति ।*
= इससे द्वारा बुखार आदि गर्मी के रोग नहीं उत्पन्न होते ।
*निम्बपत्रमरीचिकासेवनेन रोगप्रतिरोधकक्षमता वर्धते ।*
= नीम की पत्तियों और मरिच के सेवन से रोगप्रतिरोधकक्षमता बढ़ती है ।
*अधुना कुसुमाकरः ऋतुः प्रचलति ।*
= अभी वसंत ऋतु चल रही है ।
*अस्मिन् ऋतौ प्रकृतिः नूतना भवति ।*
= इस ऋतु में प्रकृति नई हो जाती है ।
*वृक्षेषु कोपलपत्राणि विकसन्ति ।*
= पेड़ों पर कोपल पत्तियाँ विकसित होती हैं ।
*एवं पत्रेषु विशेषः औषधीयगुणः वर्तते ।*
= इस प्रकार की पत्तियों में विशेष औषध के गुण होते हैं ।
*चैत्रमासे निम्बपत्राणि खादितव्यानि ।*
= चैत्र माह में नीम की पत्तियां खानी चाहिए ।
*कथ्यते नवरात्रे तु अवश्यमेव खादितव्यानि ।*
= कहा जाता है नवरात्रि में जरूर खाना चाहिए ।
*पत्रैः सह मरीचिका अपि मेलनीया ।*
= पत्तियों के साथ मरिच भी मिलानी चाहिए ।
*सप्त निम्बपत्राणि पञ्चगुलिकाः च मरीचिकायाः ।*
= सात नीम की पत्तियां और पांच गोलियां मरिच की ।
*एतेषां चर्वणं अथवा पेषणं कृत्वा गुलिकारूपेण सेवनं कर्तव्यम् ।*
= इनको चबाकर या पीसकर गोलीरूप में सेवन करना चाहिये ।
*एतेन ज्वरादयः ग्रीष्मरोगाः न उद्भवन्ति ।*
= इससे द्वारा बुखार आदि गर्मी के रोग नहीं उत्पन्न होते ।
*निम्बपत्रमरीचिकासेवनेन रोगप्रतिरोधकक्षमता वर्धते ।*
= नीम की पत्तियों और मरिच के सेवन से रोगप्रतिरोधकक्षमता बढ़ती है ।
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