Monday, July 1, 2019

6 enemies sanskrita subhashitam

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*षण्णामात्मनि नित्यानामैश्वर्यंयोधिगच्छति।*
*न स पापैः कुतो नर्थैंर्युज्यतेविजितेँद्रियः।।*
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भावार्थ - *मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।*
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*The six enemies who are constantly living in mind - work, anger, greed, attachment, item, and matsarya, who can controll all this. He does not get involved with jitendriy male sins. Then what is the matter of the disasters arising from them?*
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*आपका आज का दिन मंगलमय रहे।*
*🙏🌹🚩सुप्रभातम्🚩🌹🙏*

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