Thursday, January 3, 2019

Never ending disease-Sanskrit subhashitam

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*य ईर्षुः परवित्तेषु रुपे वीर्ये कुलान्वये।*
*सुखसौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिरनन्तकः॥*
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 भावार्थ : *जो व्यक्ति दूसरों की धन -सम्पति ,सौंदर्य ,पराक्रम ,उच्च कुल ,सुख ,सौभाग्य और सम्मान से ईर्ष्या व द्वेष करता है वह असाध्य रोगी है। उसका यह रोग कभी ठीक नहीं होता।*
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*The person who is jealous and hated by the wealth, beauty, power, good family, happiness, good fortune and honor of others is an abominable patient. This disease is never cured.*
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*आपका आज का दिन मंगलमय रहे।*
*🙏🌹🚩सुप्रभातम् 🚩🌹🙏*

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