|| *ॐ* ||
" *सुभाषितरसास्वादः* "
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" *कवयःप्रशस्ति* " ( १९३ )
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*श्लोक*------
" यस्याः चोरः चिकुरनिकरः कर्णपूरो मयूरः
भास्त्रो हासः कविकुलगुरु कालिदास विलासः ।
हर्षो हर्षः ह्रदयवसतिः पञ्चबाणः तु बाणः
केषां नैषा कथय कविता कामिनी कौतुकाय ?
( जयदेव--- प्रसन्नराघवतारक )
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*अर्थ*----
चोर नामक कवी जिसका केशकलाप , मयूर कवी यह जिसका कर्णभूषण, भास कवी जिसका हास्य, कविकुलातील श्रेष्ठ ऐसा कालिदास उसका विलास, ( मतलब शोभा ), कवी हर्ष यह जिसका हर्ष है , बाण कवी उसके ह्रदय में रहनेवाला मदन है ।
ऐसा कवितारूपी सुन्दरी का किसको कौतुक नही होगा ?
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*गूढ़ार्थ*----
सुभाषितकार ने एक ही श्लोक में संस्कृत के प्रसिद्ध कवियों का गुणवर्णन किया है । जो पढने के साथ ही ज्ञानवर्धक भी है ।
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / नागपुर महाराष्ट्र
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