*।।श्री कमल् नेत्र स्तोत्रम्।।* 🌸🍃🌸🍃
*श्री कमलनेत्र कटि पीताम्बर, अधर मुरली गिरधरम्।*
*मुकुट कुण्डल कर लकुटिया, सांवरे राधे वरम्।।*
*कूल यमुना धेनु आगे, सकल गोपी मन हरम्।*
*पीत वस्त्र गरुड़ वाहन, चरण सुख नित सागरम्।।*
*करत कोलि किलोल निशदिन, कुंज भवन उजागरम्।*
*अजर अमर अडोल निश्चल, पुरुषोत्तम अपरा परम्।।*
*दीनानाथ दयाल गिरिधर, कंस हिरणाकुश हरणम्।*
*गल फूल भाल विशाल लोचन, अधिक सुन्दर केशवम्।।*
*बंशीधर वासुदेव छइया, बलि दल्यो श्री वामनम्।*
*जल डूबते गज राख लीनों, लंक छेघो रावनम्।।*
*सप्त दीप नवखण्ड चौदह, भवन कीनों एक पदम्।*
*द्रौपदी की लाज राखी, कहां लौ उपमा करम्।।*
*दीनानाथ दयाल पूरण, करुणामय करुणाकरम्।*
*कविदत्त दास विलास निशदिन, नाम जप नित नागरम्।।*
*प्रथम गुरु के चरण बन्दौं, यस्य झान् प्रकाशितम्।*
*आदि विष्णु जुगादि ब्रह्मा, सेविते शिव शंकरम्।।*
*श्रीकृष्ण केशव कृष्ण केशव, कृष्ण यदुपति केशवम्।*
*श्रीराम रघुवर, राम रघुवर, राम रघुवर राघवम्।।*
*श्रीराम कृष्ण गोविन्द माधव, वासुदेव श्री वामनम्।*
*मच्छ-कच्छ वराह नरसिंह, पाहि रघुपति पावनम्।।*
*मथुरा मे केशवराय विराजे, गोकुल बाल मुकुन्द जी।*
*श्री वृन्दावन मे मदन मोहन, गोपीनाथ गोविन्द जी।।*
*धन्य मथुरा धन्य गोकुल, जहां श्री पति अवतरे ।*
*धन्य यमुना नीर निर्मल, ग्वाल बाल सखा वरे ।।*
*नवनीत नागर करत निरन्तर, शिव विरंचि मन मोहितम्।*
*कालिन्दी तट करत क्रीडा, बाल अर्भ्दुत सुन्दरम्।।*
*ग्वाल बाल सब सखा विराजे, संग राधे भामिनी।*
*बंशी वट तट निकट यमुना, मुरली की टेर सुहावनी।।*
*भज राघवेश रघुवंश उत्तम, परम राजकुमार जी।*
*सीता के पति भक्तन क गति, जगत प्राण आधार जी।।*
*जनक राजा पनक राखी, धनुष बाण चढ़ावही।*
*सति सीता नाम जाके, श्री रामचन्द्र प्रणामही।।*
*जन्म मथुरा खेल गोकुल, नन्द के हृदि नन्दनम्।*
*बाल लीला पतित पावन, देवकी वसुदेवकम्।।*
*श्री कृष्ण कलिमल हरण जाके, जो भजे हरिचरण को।*
*भक्ति अपनी देव माधव, भवसागर के तरण को।।*
*जगन्नाथ जगदीश स्वामी, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्।*
*द्वारिका के नाथ श्री पति, केशवं प्रणमाम्यहम्।।*
*श्रीकृष्ण अष्टपदपढ़त निशदिन, विष्णुलोक सगच्छतम्।*
No comments:
Post a Comment