Thursday, June 11, 2020

Krishna’s return from Mathura - Sanskrit poem

कृष्णस्य मथुरागमनात्
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श्रीशून्या यमुना विरागवदना भावेन हीनाधुना
कुञ्जे मञ्जुलता न वापि कुसुमं चालिर्न वा खेलति।
राधा बाधितमानसा हतहसा रासारसा दुर्दशा
वैकल्येन समस्तगोपनगरं कृष्णे गतेरिपुरम्।।
                      (व्रजकिशोरः)

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