Monday, June 8, 2020

Heart of men is stone - Sanskrit subhashitam

|| *ॐ* ||
   " *सुभाषितरसास्वादः* " 
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  " *स्त्रीनीति* " ( ११९ )
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    *श्लोक*-----
     " पुरुषाभ्यधिका  प्रीतिः  स्त्रीणामिति  न  निश्चितम् ।
       वरीयसी  भवत्येषा  निर्विवादमिदं पुनः " ।।
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*अर्थ*----
पुरुष  प्रेम  करता  है  और  स्त्री  भी  प्रेम  करती  है ।  किन्तु  अगर  उनके  प्यार  की  तुलना  की  जायेगी  तो  स्त्री का  प्रेम  आकार  से  ज्यादा  भरेगा  ऐसे  निश्चितता  से  कह  नही  सकते , किन्तु  स्त्री  का  प्रेम  प्रकार  से  ज़रुर  पुरुषों  से  वरिष्ठ  निकलेगा ।  इसमें  कोई  मतभेद  नही ।
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*गूढ़ार्थ*-------
स्त्री  का  प्रेम  पुरुष  से  वरिष्ठ  कैसा ?  स्त्रीयों  के  प्रेम  में  उत्कंठा  और  तीव्रता  अधिक  होती  है ।  प्रेम  स्त्री  का  जीवनसर्वस्व  होता  है  तो  पुरुषों  के  आयुष्य का  प्रेम  केवल  एक  भाग  होता  है ।  इसिलिए  पुरुषों  पर  
 " कठोर  ह्रदय " का  आरोप  भी  लगता  है शायद ।  
अनुभवी  सुभाषितकार  ने  हमे  स्त्री  के  प्रेम  के  बारे  में  बहुत ही  सुन्दर तरीके से  समझाया  है ।
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*卐卐ॐॐ卐卐*
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डाॅ. वर्षा  प्रकाश  टोणगांवकर 
पुणे  /   महाराष्ट्र 
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