|| *ॐ* ||
" *सुभाषितरसास्वादः* "
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" *कूटप्रश्न* " ( २०८ )
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*श्लोक*----
" किमच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः ।
को वन्द्यः सर्व देवानां दीयोतामेकामुत्तरम् ।। "
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*अर्थ*-----
मनुष्य को काशी में किसकी इच्छा रहती है ? राजाओं को रणांगण में क्या हितकारक होता है ? सर्व देवों को वन्दनीय कौन है ?
इन सब का उत्तर एक ही शब्दों में दीजीए ।
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*गूढ़ार्थ*----
काशी जैसे तिर्थक्षेत्र में जाकर अगर मनुष्य को मरण प्राप्त हुआ तो उसे स्वर्गलोक मिलता है ऐसा माना जाता है । इसलिये पहले प्रश्न का उत्तर है *मृत्यु* । ( मृत्यु पर विजय प्राप्त करना ) ।
रणांगण में विजय प्राप्ति से राजा की प्रतिष्ठा बढती है । इसलिये दूसरे प्रश्न का उत्तर है *जय* । ( मृत्युपर मात करना ) ।
इस संसार में मृत्यु के सामने सभी को झुकना पडता है , पर जिसने साक्षात मृत्यु पर भी विजय प्राप्त की है वह मृत्युन्जय शंकर ही तो सब देवों का लाडला है ।
और सब एक ही शब्दों में कहना हो तो देवों का वन्दनीय है ----
*मृत्युन्जय* ।
हो गयी न कूटप्रश्न की उकल ?
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / नागपुर महाराष्ट्र
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