चित्तमिन्द्रियसेनाया नायकस्तज्जयाज्जयः।
उपानद्गूढपादस्य ननु चर्मावृतैव भूः॥
--सुभाषितावलिः ३.३४७
चित्तम् इन्द्रिय-सेनायाः नायकः तत्-जयात् जयः। उपानद्-गूढपादस्य ननु चर्म-आवृता एव भूः॥
इन्द्रिय-सेनायाः नायकः चित्तम् । तत्-जयात् जयः। ननु उपानद्-गूढपादस्य भूः चर्मावृता एव॥
इन्द्रियों की सेना का नायक चित्त है। उसके जीतने से जीत है। चप्पल से पैर को ढकने से सारी भूमि पर चर्म की बिछाव के समान ही तो है।
Mind is the master of the entire army of senses. Hence winning over the mind is the real victory. A person with leather footwear feels as though the whole earth is covered by hide.
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