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" *वन्देसंस्कृतमातरम्* "
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" *लौकिकन्यायकोशः* " ( १४९ )
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" *सूत्रशाटिकान्यायः* "
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एकदा कश्चन तन्तुवायं प्रति गत्वा " एतैः सूत्रैः शाटिकां वय " इति उक्तवान् । तदा सः तन्तुवायः चिन्तितवान् शाटिकां वय इति कथं भवेत्? वयनात् अनन्तरम् एव शाटिका भवति खलु इति चिन्तितवान् ।
इग्यणः संप्रसारणम् इति पाणिनीयसूत्रे ( १-१-४५ ) महाभाष्ये अयम् उल्लिखितः ।
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / नागपुर महाराष्ट्र
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