Wednesday, August 29, 2018

Sanskrit verses for Sanskrit day

संस्कृतदिवसनिमित्तम्
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(१)
यत् संस्कृतं देवपुरस्य भाषा
वेदस्य भाषा मुनिलोकभाषा।
पुराणभाषा स्मृतितत्त्वभाषा
संस्कारभाषा च पवित्रभाषा।।
(२)
सत्कर्मभाषा हितकर्मभाषा
जीवस्य भाषा गृहशुद्धभाषा।
तीर्थस्य भाषाखिलतत्त्वभाषा
विमुक्तिभाषा परिसिद्धभाषा।।
(३)
धर्मस्य भाषा विभवस्य भाषा
कामस्य भाषा खलु मुक्तिभाषा।
सुनीतिभाषा नृपनीतिभाषा
भाषासु शिष्टा सुजनस्य भाषा।।
(४)
रामायणस्था मधुरस्य भाषा
सेयं महाभारतलेखभाषा।
आयुर्गमा दर्शनशास्त्रभाषा
सहित्यिका व्याकरणोक्तभाषा।।
(५)
काव्यस्य भाषा रससृष्टिभाषा
ज्ञानस्य भाषा कविवृन्दभाषा।
सद्भावभाषा गुणराशिभाषा
विनम्रभाषा सरलस्य भाषा।।
(६)
स्नेहस्य भाषा विबुधस्य भाषा
सम्मानभाषा शुभदायिभाषा।
राज्ञां च भाषा सचिवस्य भाषा
विज्ञानभाषा ग्रहचक्रभाषा।।
(७)
भाषाभिवन्द्या सुरकार्यदक्षा
दुर्दण्डदण्ड्या यमचाण्ड्यखण्ड्या।
अभेदभेद्याखिलकार्यसाध्या
त्रितापतापा भवसिन्धुनौका।।
(८)
भद्रातिभद्रा नमनीयभावा
क्रोधेन हीना समभावपूर्णा।
प्रशान्तभावा कमनीयरूपा
समग्रविश्वस्य समृद्धिकामा।।
(९)
आशीःप्रदात्री बहुभाग्यदात्री
प्रफुल्लदात्री जनशौर्यदात्री।
सौन्दर्यकर्त्री सुरराज्यदात्री
यशोविभर्त्री गुणभाण्डधर्त्री।।
(१०)
हे संस्कृतज्ञा! यदि संस्कृतं नः
गृहे सुतानां वदने सदा स्यात्।
क्रमेण तत् भास्यति सर्वविश्वे
तदा जनानां सुखदा भवेत् सा।

(श्रीव्रजकिशोरत्रिपाठी)

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