अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च।।
वञ्चनं चापमानं च मतिमान् न प्रकाशयेत्।।चाणक्य नीतिशतक।।
अपने धन की हानि, मानसिक क्लेश, घर मे हुए दुष्कर्म, स्वयं के ठगे जाने की बात तथा अपने अपमान की बात को बुद्धिमान व्यक्ति प्रकाशित न करे।
🔔🔔A wise man shoud not make public the loss of money, mental agony, the bad deeds of the members of his family and his deception and insult.🔔🔔
🔔🔔शुभदः स्यात् रविवासरः,सुप्रभातम्🔔🔔
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