Tuesday, November 17, 2020

Loan- Sanskrit subhashitam

|| ॐ ||

|| सुभाषित रसास्वादः ||[३४२]

'' ऋण ''

'' पापं कर्तुमृणं कर्तुं  मन्यन्ते मानवाः सुखम् |

परिणामोऽतिगहनो महतामपि नाशकृत् || ''

अर्थ—मनुष्य पाप करने में तथा ऋण करने में सुख का अनुभव करता है, परन्तु उसका परिणाम इतना भयंकर होता है कि इससे बड़ों-बड़ों का नाश हो जाता है |

गूढार्थ— सुभाषितकार ने हमे पाप और ऋण से क्या  स्थिति होती है, इसके बारे में हमे बताया है | पाप से नरकयातना और ऋण से पुनर्जन्म निश्चित ही है |

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

डॉ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर

पुणे / महाराष्ट्र

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