Friday, July 24, 2020

Double meaning Sanskrit sloka

|| *ॐ* ||
    " *सुभाषितरसास्वादः* "
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    " *कूटप्रश्नः* " ( १८२ )
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   *श्लोक*---
   " गोपालो  नैव  गोपालस्त्रिशूली  नैव  शंकरः ।
    चक्रपाणिः  स  नो  विष्णुर्यो  जानाति  सः पण्डितः " ।।
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*अर्थ*-----
  चरवाह  इसकी  रक्षा  करते  है  पर  वह  गोपालकृष्ण  नही ।  त्रिशूलधारी  है  पर  शंकर  नही ।चक्र  धारण  करता  है  पर  विष्णु  नही । इसे  जो  पहचानेगा  वही पण्डित  कहालेयेगा ।  
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   *गूढ़ार्थ*------
    यहाँ  पर  गोपाल, त्रिशूली  और  चक्रपाणि  इस  पद  के  दो -दो  अर्थ  निकल  रहे  है ।  गोपाल= शेतकरी ( खेती  करने वाला ) और  श्रीकृष्ण।
त्रिशूलि= तीन सिंगोवाला ।  और  शंकर ।
चक्रपाणि = विष्णु । और  जो  तेल  निकालने  में  साहाय्यक  रहता है।
अब  इसका उत्तर  जो  देगा  वही  पण्डित  कहलायेगा ।
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*卐卐ॐॐ卐卐*
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डाॅ. वर्षा  प्रकाश  टोणगांवकर 
पुणे  /   महाराष्ट्र 
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