|| *ॐ* ||
" *सुभाषितरसास्वादः* "
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" *कूटप्रश्नः* " ( १८२ )
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*श्लोक*---
" गोपालो नैव गोपालस्त्रिशूली नैव शंकरः ।
चक्रपाणिः स नो विष्णुर्यो जानाति सः पण्डितः " ।।
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*अर्थ*-----
चरवाह इसकी रक्षा करते है पर वह गोपालकृष्ण नही । त्रिशूलधारी है पर शंकर नही ।चक्र धारण करता है पर विष्णु नही । इसे जो पहचानेगा वही पण्डित कहालेयेगा ।
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*गूढ़ार्थ*------
यहाँ पर गोपाल, त्रिशूली और चक्रपाणि इस पद के दो -दो अर्थ निकल रहे है । गोपाल= शेतकरी ( खेती करने वाला ) और श्रीकृष्ण।
त्रिशूलि= तीन सिंगोवाला । और शंकर ।
चक्रपाणि = विष्णु । और जो तेल निकालने में साहाय्यक रहता है।
अब इसका उत्तर जो देगा वही पण्डित कहलायेगा ।
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / महाराष्ट्र
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