Friday, June 5, 2020

glory of lady - Sanskrit subhashitam

|| *ॐ* ||
    " *सुभाषितरसास्वादः* "
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   " *स्त्रीप्रशंसा* " ( १८९ )
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     *श्लोक*-----
   " न हयैर्न  न  मातङ्गैर्न  रथैर्नच  पत्तिभिः ।
    स्त्रीणामपाङ्गदृष्ट्यवै जीयते  जगतां  त्रयम् " ।। ( शार्ङ्गधरपद्धतिः)
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   *अर्थ*----
   अश्व , हाथी , रथ  या  फिर  बडा  सैन्य  इसके  द्वारा  विजय  पाना  संभव  है, किन्तु  ऐसा  समझना  गलत  है । सत्य  तो  यही  है  की  स्त्री  का  एक नेत्रकटाक्ष  ही  तीनों  लोगो  को  जीता  देता  है ।
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   *गूढ़ार्थ* -----
   स्त्रियों  के  नेत्रशक्ति  का  बहुत सुन्दर तरीके से  वर्णन  सुभाषितकार  ने  किया  है । वैसे  भी  बडे - बडे  विद्वानों  ने  स्त्री  को  नेत्र  के  कारण  ही  जादूगरनी  माना  है ।  और  हमारे  चित्रपटसृष्टि  के  गाने  में भी  स्त्रियों  के नेत्रों  को  महत्त्वपूर्ण  स्थान  मिला  है । राजे महाराजे  भले  ही  रथ ,हाथी सैन्य के  द्वारा  युद्ध जीतते  होंगे  पर  स्त्री  तो  एक नेत्रकटाक्ष  से  तिनों  लोगों  को  जीतती  है । 
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   *卐卐ॐॐ卐卐*
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डाॅ. वर्षा  प्रकाश  टोणगांवकर 
पुणे  / महाराष्ट्र 

  
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