*क्रोधः प्राणहरः शत्रु: क्रोधो मित्रमुखी रिपुः।*
*क्रोधो हि असिर्महातीक्ष्णः सर्वं क्रोधोपकर्षति।।*
*क्रोध एक प्राणहरण करने वाले शत्रु के समान है तथा मित्रों के बीच शत्रुता होने का कारण भी होता है। क्रोध एक तीक्ष्ण तलवार के समान है जो सब् को अपमानित कर हानि पहुंचाता है।*
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