|| *ॐ* ||
" *सुभाषितरसास्वादः* "
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" *व्यवहारनीति* " ( ५५ )
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*श्लोक*----
" विद्या , विद्युत् , वित्तं , वन्हिः, जनौघ , जलौघ विकाराः ।
नियोजिता कामधू , पीडिता आशु- मुक्ताः अतिहानिकारकाः "।।
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*अर्थ*----
विद्या , वीज , पैसा , अग्नि , पानी और जनसमुदाय इनका नियोजनपूर्वक उपयोग किया तो ही वह फायदेशीर होता है ।
उनको अगर दबा के रखेंगे और एकदम से छोडेंगे तो वह हानिकारक होता है ।
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*गूढ़ार्थ*-----
उपर उल्लेखित छह चीजें शक्तिरूप है । उनके उपर नियंत्रण करके और योग्य मार्ग से इनका उपयोग किया जाय तो इनकी शक्ति से बडे से बडा कार्य भी संपन्न कर सकते है । और एकसाथ इनको रोक कर रखा और फिर एकदम से छोड़ा तो ज्यादा शक्ति एकत्र होने के कारण और फिर नियंत्रण न रहने के कारण इनकी तीव्रता बढ जाती है और फिर यह सब चीजे हानीकारक हो जाती है ।
वीज ,अग्नी , पानी और जनसमुदाय इन चीजों का प्रभाव तत्काल दिखाई पडता है । विद्या और पैसा इनके बारे में सौम्यत्वसे पता चलता है ।
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / महाराष्ट्र
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