Wednesday, May 29, 2019

Sanskrit subhashitam

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⛳🌞 विदग्धा वाक् ⛳

*गोशतादपि गोक्षीरं प्रस्थं ग्रामशतादपि ।*
*प्रासादादपि खट्वार्धं शेषं परविभूतये ॥*
--सुभाषितमञ्जरी ४९१-५०४

गोशताद् अपि गोक्षीरं प्रस्थं ग्रामशताद् अपि । प्रासादाद् अपि खट्वार्धं शेषं परविभूतये ॥

गोशताद् अपि गोक्षीरं, ग्रामशताद् अपि प्रस्थं, प्रासादाद् अपि खट्वार्धं, शेषं परविभूतये (भवति)॥

सौ गायों से (बढ़कर) गाय का दूध है;  सौ गाँवों से (अधिक) एक छोटा सा (रहनेका) स्थान है; राजमहल से भी (बढ़कर) पलंग का आधा भाग है। बाकी सब दूसरों के भलाई के लिए है।

Cow's milk is better than a hundred cows. A small piece of land is better than a hundred villages. Half of a bed is better than a palace. Everything else is for others' welfare. 

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