||ॐ||
" *वन्देसंस्कृतमातरम्* "
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☆आयुषि एतादृशाः जनाः योजयन्तु , ये समयानुसारेण् युष्माकम् छाया भूत्वा तिष्ठन्ति तथा च समयानुसारेण् दर्पणः भूत्वा तिष्ठन्ति।
☆दर्पणेन कदापि असत्यम् न उच्यते तथा च छाया कदापि युष्माकम् सड़्गतिम् न त्यज्यति।
सुप्रभातम्/ शुभदिनम् च।
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / नागपुर महाराष्ट्र
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