Monday, September 3, 2018

Disease & relative - sanskrit sloka

परोऽपि हितवान् बन्धुः 
     बन्धुरप्यहितः परः।
*अहितो देहजो व्याधिः   
      हितमारण्यमौषधम्॥

बीमारियाँ हमारे शरीर के भीतर रहते हुए भी हमारा बुरा करती हैं और औषधियाँ हमसे दूर  रहकर भी हमारा भला करती हैं (अर्थात् व्याधियाँ हमारी शत्रु हैं और औषधियाँ मित्र)। इसी प्रकार रिश्तेदार न होते हुए भी जो हमारा हित करे वही वास्तव में अपना होता है और रिश्तेदार होते हुए भी हमारा अहित करे तो वह पराया होता है। 🙏🏻💐🙏🏻 *आपका आज का दिन परम् प्रसन्नता से परिपूर्ण रहे, ऐसी शुभकामना *🙏🏻💐🌺🌸🌷💐🌺🌸🌷💐🌺🌸

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