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" *वन्देसंस्कृतमातरम्* "
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" *लौकिकन्यायकोशः* " ( १५१ )
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" *समुद्रमन्थनन्यायः* "
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देवदानवयोः मन्थनेन क्षोभः प्राप्तः समुद्रस्य । परन्तु तस्य मन्थनस्य फलम् अमृतरूपेण प्राप्तं देवैः। एवं कष्टम् एकेन सोढं फलम् अन्येन भुक्तम् इति अयं न्यायः सूचयति ।
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डाॅ. वर्षा प्रकाश टोणगांवकर
पुणे / नागपुर महाराष्ट्र
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