Wednesday, August 29, 2018

Paanakam -Sanskrit simile

|| *ॐ* ||
   " *वन्देसंस्कृतमातरम्* "
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   " *लौकिकन्यायकोशः* " ( १५६ )
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    " *प्रपाणकरसन्यायः* " ( *पानकरसन्यायः*)
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  शर्करा , लवणं , शुण्ठी इत्यादिनां  वस्तूनां  संमिश्रणेन  एकः  आस्वाद्यः  पानकरसो  भवति ।  एवमेव  लोके  परस्परभिन्नानां  संमिश्रणेन  विलक्षणरूपं  लभ्यते ।  तथैव  विभाव-- अनुभाव--संचारिभावानां  मिश्रणेन विलक्षण  रसाभिव्यक्तिः  भवति ।
*यथा*--- सकलसह्रदयसंवादभाजा  साधारण्येन  स्वाकार  इवाभिन्नोऽपि  गोचरीकृतः  चर्व्यमाणं  नैकप्राणो  विभावादिजीविप्यवधिः  पानकरस  न्यायेन चर्व्यमाणः-------  ब्रह्मास्वादमिवानुभावयन्  अलौकिक  चमत्कारकारी  शृङ्गारादिको  रसः ।  ( काव्यप्रकाशचतुर्थोल्लासे )
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डाॅ. वर्षा  प्रकाश  टोणगांवकर 
पुणे  / नागपुर  महाराष्ट्र 
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