Monday, March 27, 2017

100 years

Courtesy: http://mahendra-arya2.blogspot.in/2011/01/i.html

जीवेम शरदः शतं I

ओम् तत् चक्षुः देव हितं पुरस्तात शुकं उच्चरत  I 
पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतं I 
श्र्णुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतं I 
अदीनः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात् II 
- यजु. ३६/२४

He is the seer of all , benefactor of the righteous . ever present , illuminating eye of the world has arisen in pure form before us. With his kind grace , we may see for a hundred years, may we live for a hundred years , may we hear for a hundred years , may we speak for a hundred years , may we live without suffering and humiliation for a hundred years and beyond that .

ब्रह्माण्ड तेरा रूप है , यह विश्व तेरा क्षेत्र है
इस विश्व को है देखता , सूरज तुम्हारा नेत्र है

हम भी इसे देखें प्रभु, सौ वर्ष तक देखें प्रभु
आँखों में तेरा तेज है , हर दृश्य तेरा चित्र है

सौ वर्ष तक इन कानों से हम , तेरे सुने गुण गान हम
तू ही हमारा इष्ट है , तू ही हमारा मित्र है

शत वर्ष तेरी भक्ति हो , रोगों से हरदम मुक्ति हो
तेरी शरण में है पिता , तू ही दयालु पितृ है